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लेखनी प्रतियोगिता -01-Nov-2022 मेरी खुशियां तुझसे ही हैं


    शीर्षक। :- मेरी खुशी तुझ से ही है

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                   पचास वर्षीय राम नाथ ने सुबह सुबह करवट ली और हमेशा की तरह अपनी पत्नी लक्ष्मी को चाय बनाने को कहा और फिर रजाई ढक कर करवट ले कर सोगये।
   
              कुछ पल  तक वह चाय का इन्तजार करते है परन्तु जब रसोई  से  कोई आवाज नहीं आई तब वह फिर उठे और उन्हौने पुनः आवाज लगाई लक्ष्मी आज तुम कौनसी गहरी नींद में सोगयी हो जो अभी तक चाय नहीः बनाई।
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                  जब फिरभी कोई प्रतिक्रिया नही हुई अतब वह सोचने लगे ऐसा तो  कभी भी नही हुआ था इसलिए  रामनाथ ने लाईट जलाई और लक्ष्मी को हिलाया पर कोई हलचल ना होने पर वह घबरा से गए.
रजाई हटाई तो मीता निढाल सी एक ओर पडी थी. ना जाने रात ही रात मे क्या हो गया।
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    अचानक लक्ष्मी का इस तरह से उनकी जिंदगी से हमेशा हमेशा ले लिए चले जाना …. असहनीय था.।धीरे धीरे जैसे पता चलता रहा लोग इकठठे होते रहे और उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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              एक हफ्ता किस तरह बीता उन्हे कुछ याद ही नही. उन का एक ही बेटा था जो कि अमेरिका रहता था । पढाई के बाद वही नौकरी कर ली थी.।   बेटा अमेरिका से आकर  बापिस जाने की भी तैयारी करने लगा था।
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              उसने अपने पापा को भी साथ चलने को कहा और वह मजबूरी बस  तैयार भी हो गए। पर लक्ष्मी की याद को अपने दिल से  नहीं निकाल पा रहे थे।

                        अब वह लक्ष्मी की एक एक घटना याद करते और उनको उसकी हर बात मे अच्छाई ही नजर आने लगी। उन्हे याद आता कि कितना ख्याल रखती थी  लक्ष्मी।   परन्तु वह   कोई भी मौका नही चूकते थे उसे गलत साबित करने का। उनको याद आरहा था ना कभी उसकी तारीफ करते और ना कभी उसका मनोबल बढाते बल्कि हर काम मे उसकी गलती निकालने मे उन्हे असीम शांति मिलती थी।
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          जब कि लक्ष्मी  दिनभर काम मे जुटी रहती थी। एक बार् की घटना उनको यिद आगयी जब काम वाली बाई 2 महीने की छुट्टी पर गई थी तब भी लक्ष्मी इतने मजे से सारा काम बिना किसी दर्द और शिकन के आराम से गीत  गुनगुनाते हुए किया करती थी जबकि कोई दूसरी महिला होती तो हंगामा खडा़ कर देती। वह उस समय भी उसकी हजारौ कमियां गिनाते हुए नहीं चूकते थे।.


              अब राम नाथ दिन रात  उनकी यादो के सहारे जीने लगे.
काश वह तब उसकी कीमत जान पाते. काश वो तब उसकी प्रशंसा कर पाते. काश ….  परन्तु  अब तो बहुत देर हो चुकी थी।
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        आज जब  अमेरिका जाने के लिएअपना सामान पैक कर रहे थे।
पैक करते करते  लक्ष्मी की फोटो को देख कर अचानक फफक कर रो पडे और बोले लक्ष्मी,मुझे माफ कर  देना मै तेरी कीमत नहीं समझ सका। प्लीज वापिस आ जाओ . मै तुम्हारे बिना कुछ नही हूं. आज जान गया हूं कि मै तुमसे कितना कितना प्यार करता हूं…यहाँ सब कुछ तुझसे ही है तेरा बिना सब सूना है।
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                   तभी उन्हें किसी ने   झकझोरा और उनकी आँख खुलगयी।  इससे पहले वो खुद को सम्भाल पाते अचानक उनकी पत्नी
लक्ष्मी उन्हे घबराई हुई आवाज मे उठा रही थी क्यौकि   वह सब सपना था।
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           एक बार तो उन्हे विश्वास ही नही हुआ पर दूसरे पल उन्होने लक्ष्मी  का हाथ अपने हाथो मे ले लिया उनकी आखो से आसूं लगातार बहे जा रहे थे। लक्ष्मी की समझ में कुछ नही आरहा था कि यह सब क्या होरहा है।

                 बस एक ही बात कह पाए … आई लव यू  लक्ष्मी !!!! आई लव यू !!!  मेरी सभी खुशियां केवल तुझसे है । तेरे बिना यहां कुछ भी नही है मुझे मांफ करदे मै तेरी कीमत आजतक नही समझ सका था आज मेरी समझ मे सब आगया।


         लक्ष्मी भी अपनी नम हुई आखो से अपलक रामनाथ को ही देखे जा रही थी…


आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।

नरेश शर्मा  "पचौरी "

01/11/2022

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8 Comments

Khushbu

13-Nov-2022 05:55 PM

Nice 👍🏼

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Mahendra Bhatt

04-Nov-2022 04:31 PM

बहुत खूब

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Palak chopra

03-Nov-2022 03:06 PM

Shandar 🌸

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